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अखिल भारतीय बौद्ध अध्ययन संघ का सम्मेलन















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सांची विवि में संपन्न हुआ अखिल भारतीय बौद्ध संघ सम्मेलन
बौद्ध धर्म सनातनता का भारतीय स्वरुप, दे सकता है समकालीन चुनौतियों का समाधान

 

सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय बौद्ध अध्ययन संघ का 17वां सालाना समारोह संपन्न हुआ। 13 से 15 अक्टूबर के तीन दिवसीय समारोह में बौद्ध धर्म की समकालीन उपयोगिता और बुद्ध के संदेश पर गंभीर चर्चा हुई। समापन समारोह के अध्यक्ष और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि बौद्ध मत में दुनिया को तारने की संभावना मौजूद है। उन्होने उम्मीद जताई कि बौद्ध दर्शन से समकालीन चुनौतियों का समाधान मिल सकता है। प्रो शुक्ल ने कहा कि बुद्ध का संदेश अक्षम हो चुकी प्रणाली के विरुद्ध था और बुद्ध की दृष्टि वयक्ति और समाज के कल्याण की थी। उन्होने कहा कि सनातनता जड़ता नहीं है बल्कि निरंतरता है। प्रो शुक्ल के मुताबिक प्रतिभागी लोकतंत्र ही विश्व समस्याओं का समाधान है औऱ बौद्ध धर्म व्यक्ति की पहचान को प्रतिनिधित्व करता है।

 

अखिल भारतीय बौद्ध संघ के सचिव प्रो वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि मौजूदा वक्त में जरुरत है कि शोध में गंभीरता और वस्तुपरकता बनाई रखी जाए। उन्होने शोध-पत्रों में भारतीय चिंतकों और लेखकों के संदर्भ देने का भी आव्हान किया। संगोष्ठी के दौरान नए विषयों Blood Writing in Buddhism, बुद्ध और अंबेडकर की दृष्टि में महिला सशक्तिकरण, आतंकवाद के समाधान में बुद्ध और  अहिंसा और मोबाइल फोन की लत छुड़ाने में बुद्धिज्म जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत हुए।

 

13 से 15 अक्टूबर तक हुए समारोह में 118 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। 13 तारीख को शुभारंभ सत्र के बाद दो विशेष वक्तव्य हुए एवं दोपहर बाद तीन समानांतर सत्र आयोजित हुए। संगोष्ठी के दूसरे दिन समानांतर सत्र और 15 अक्टूबर को समापन सत्र के साथ 3 समानांतर सत्र हुए। संगोष्ठी में पाली भाषा और साहित्य, बौद्ध संस्कृत भाषा और साहित्य, अपभ्रंष साहित्य में बौद्ध धर्म, मध्य और पूर्व एशियाई देशों की भाषाओं (तिब्बती, चीनी, जापानी, थाई सिंहली) में बुद्धिज्म, भारत और विश्व में बौद्ध धर्म का इतिहास, बौद्ध दर्शन, समसामयिक और व्यवहारिक बौद्ध धर्म, तुलनात्मक बौद्ध धर्म, भारतीय हिमालयीन बुद्धिज्म और बौद्ध पर्यटन जैसे विषय पर गूढ़ एवं गंभीर चर्चा इस संगोष्ठी में होगी।

  

सन 2000 में गठित अखिल भारतीय अकादमिक बौद्ध अध्ययन संघ अभी तक 16बार अखिल भारतीय बौद्ध संघ की बैठक कर चुका है। देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों में होने वाली इस संगोष्ठी का उद्देश्य उभरते और प्रतिष्ठित बौद्ध विद्वानों के मध्य संवाद और उनके द्वारा अर्जित ज्ञान को अकादमिक स्तर पर उपलब्ध कराना है।