आज़ादी का अमृत महोत्सव
Events
Gallery

23 से 25 नवंबर के बीच इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज (ISBS) का रजत जयंती सम्मेलन

23 से 25 नवंबर के बीच इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज (ISBS) का रजत जयंती सम्मेलन

11 नवंबर, 2025

प्रति,

संपादक महोदय,

दैनिक ..................................

प्रेस विज्ञप्ति

साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में 23 से 25 नवंबर के बीच इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज (ISBS) का रजत जयंती सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसमें देश-विदेश के 150 से अधिक विद्वान, शोधार्थी और बौद्ध धर्म के ज्ञाता भाग ले रहे हैं।

रजत जयंती सम्मेलन: इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज

स्थान: साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्ववि

द्यालय, मध्य प्रदेश तिथि: 23 से 25 नवंबर 2025

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता

सम्मेलन में वियतनाम, म्यांमार और श्रीलंका से प्रतिष्ठित बौद्ध विद्वान सहभागिता कर रहे है, जो बौद्ध दर्शन, संस्कृति और इतिहास पर अपने विचार साझा करेंगे।

राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व

भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे नव नालंदा महाविहार, दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, कोलकाता विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय सहित अनेक संस्थानों के प्रोफेसर और शोधार्थी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब समेत -कोलकाता, पुणे, नागपुर, चेन्नई, लखनऊ, पटना और बनारस से भी प्रतिनिधि पधार रहे हैं।

विशेष सत्र

सम्मेलन में मध्य प्रदेश में बौद्ध कला एवं स्थापत्य और बौद्ध एवं भारतीय अध्ययन के मूर्धन्य विद्वान प्रो. जी.सी. पाण्डे पर दो विशेष सत्र होंगे। इनमें मध्यप्रदेश में बहुलता से उपलब्ध बौद्ध कला एवं स्थापत्य के साथ प्रो पाण्डे के लेखन, कार्यों और दृष्टिकोण पर चर्चा होगी।

चार समानांतर सत्र

सम्मेलन के दौरान चार समानांतर सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें बौद्ध दर्शन, इतिहास, साहित्य, और समकालीन बौद्ध विमर्श पर शोध प्रस्तुत किए जाएंगे।

समापन

यह सम्मेलन बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में संवाद, सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा तथा साँची को वैश्विक बौद्ध विमर्श के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। देश विदेश से पधारे विद्वान साँची की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होंगे।