भारतीय इतिहास की दुर्दशा गाने का वक्त बीता, अब गौरव गान का समय दिनांक : 07/05/2022
दिनांक : 07/05/2022
भारतीय इतिहास की दुर्दशा गाने का वक्त बीता, अब गौरव गान का समय
इतिहास को बिगाड़ना, बदलना नहीं बल्कि भारतीय दृष्टि से परिभाषित करना
दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा इतिहासकार संगोष्ठी शुरु
सांची विवि और अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति का आयोजन
भारतीय इतिहास की दुर्दशा गाने का वक्त बीत गया है और अब हमारी संस्कृति की गौरव गाथा गाने का समय है। ये विचार इतिहास पाठ्यक्रम वर्तमान परिप्रेक्ष्य और चुनौतियां पर केंद्रित राष्ट्रीय युवा इतिहासकार संगोष्ठी में व्यक्त हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि के कुलपति प्रो रजनीश शुक्ल ने कहा कि हमें इतिहास को ना बिगाड़ना है, ना बदलना है और ना ही नई दृष्टि से लिखना है बल्कि भारत की दृष्टि से परिभाषित करना है। मूल भाषाओं को जाने बिना लिखे इतिहास को श्रम करके स्त्रोतों के आधार सामने लाने का आव्हान करते हुए प्रो शुक्ल ने कहा कि यूरोप को तो 17वीं सदी तक इतिहास लिखना नहीं आता था जबकि 11वी सदी में राजतंरगिणी में साहित्यिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आधार पर इतिहास का वर्णन मिलता है।
आईएसबीएस सम्मेलन का समापन, साँची विवि को अंतरराष्ट्रीय बनाने पीएम से मिलेंगे थैरो
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साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज़ का रजत जयंती समारोह सम्पन्न हो गया। सम्मेलन में 80 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गये और 150 बौद्ध दर्शन, संस्कृति और पालि भाषा के विद्वान शामिल हुए। सम्मेलन में वियतनाम से पूज्य भिक्षु थिक नॉट टू शामिल हुए। साँची विवि के कुलगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ पर एक अभिनंदन ग्रंथ का विमोचन भी आईएसबीएस में हुआ एवं उन्हें लाइफटाइम अचिवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया। कुलगुरु ने साँची विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो को डी लिट मानद उपाधि देने का भी फैसला किया।




युद्धकाल में बौद्ध धर्म की उपयोगिता-आईएसबीएस का दूसरा दिन
युद्धकाल में बौद्ध धर्म की उपयोगिता-आईएसबीएस का दूसरा दिन
· दूसरे दिन 4 सत्रों में 50 शोध-पत्र पढ़े गये
· चित्त की शुद्धि के लिए धम्म उपदेश उपयोगी


इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज़ का रजत जयंती सम्मेलन आज से
• साँची विश्वविद्यालय कर रहा है मेज़बानी
• वियतनाम, म्यांमार और श्रीलंका सहित 150 देशों से पहुंचेंगे विद्वान

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