Press Releases
 

 

 

Press Releases - 2018

 

  • सांची विश्वविद्यालय में हर्षोल्लास से मना स्वतंत्रता दिवस

    दिनांक 15-08-2018

     

    •  - कुलसचिव श्री अदिति कुमार त्रिपाठी ने किया ध्वजारोहण
    •  - ऐष धर्म: सनातन्: है अशोक चक्र का संदेश
    •  - सांची विश्वविद्यालय का भी सूत्र वाक्य है ऐष धर्म: सनातन्:
    •  - स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री अमर सिंह ने दिया विशेष संदेश

     

    सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के बारला अकादमिक परिसर में 72वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया गया। कुलसचिव श्री अदिति कुमार त्रिपाठी ने राष्ट्रध्वज फहराने के  फहराने के बाद तिरंगे के तीनों रंगों की व्याख्या करते हुए बताया कि तिरंगे की सफेद पट्टी पर बना अशोक चक्र ऐष धर्मसनातन्: का संदेश देता है जो कि सांची विश्वविद्यालय का भी सूत्र वाक्य है। उन्होंने कहा कि ऐष धर्मसनातन्:  देश वासियों को परस्पर सहानुभूति की शिक्षा देता है। जिसका मुख्य संदेश यह है कि बैर को बैर से समाप्त नहीं किया जा सकता बल्कि बैर(वैमनस्य) को मात्र प्रेम(अवैमनस्य)से ही खत्म किया जा सकता है और ऐष धर्मसनातन: सांची विश्वविद्यालय का मूल सूत्र भी है। समारोह में मुख्य अतिथि 91 वर्ष के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री अमर सिंह जी ने कहा कि हमने आहूतियां देकर कीमत चुकाई है और आज़ादी के लिए खुदीराम बोस, अशफाकुल्ला, भगत सिंह इत्यादि ने बेहद संघर्ष किया है इसे हमें व्यर्थ नहीं गंवाना है। श्री अमर सिंह ने देश की आज़ादी के लिए क्रांतिकारियों के साथ विंध्य और बुंदेलखंड के इलाकों में संघर्ष किया था और आप इंदौर और भोपाल की जेल में अंग्रेज़ों द्वारा कैदी भी बनाए गए थे।

     

    स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर ग्राम बिलारा के स्कूली बच्चों ने भी शिरकत कर विश्वविद्यालय में एक संगीतमय कार्यक्रम प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय द्वारा ग्राम बिलारा को गोद लिया गया है। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने भी राष्ट्रभक्ति से भरपूर गीतों को प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के डीन डॉ नवीन मेहता ने बताया कि देश संस्कृत भाषा के मूल शब्ध दिशा से बना है। उन्होंने यह भी व्याख्यायित किया कि भारत शब्द भरत से बना है  जिसका अर्थ अग्नि से है। भारत का एक अर्थ उन्होंने यह भी बताया कि जो ज्ञान में लीन हो। उनका कहना था कि अखंड भारत का उद्देश्य अध्यात्म और सांस्कृतिक रूप से संवृद्धि करना है। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक श्री हरीश चंद्रवंशी ने दिया एवं संचालन बौद्ध दर्शन विभाग के प्राध्यापक श्री मुकेश वर्मा ने किया।

     

  • सांची विश्वविद्यालय ने ग्राम बिलारा में आयोजित किया स्वास्थ शिविर

    दिनांक 04-08-2018

    • - विश्वविद्यालय ने गोद लिया गांव बिलारा
    • - क्रीड़ा, योग एवं दक्षता प्रोत्साहन भी है विवि का लक्ष्य
    • - गर्भवती माताओं, किशोरियों और शिशु संबंधी कार्यक्रम से अवगत कराया
    • - क्षय रोगी किशोरी के समस्त ईलाज का खर्च उठाएंगे विवि के कुलपति
    • - विदिशा की सी.एम.ओ डॉ शशि ठाकुर थीं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि
    • - कुलपति आचार्य प्रो. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री ने किया फल वितरण

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय द्वारा आज अकादमिक परिसर के करीब के ही ग्राम बिलारा, पोस्ट-मखनी, ज़िला रायसेन में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। सांची विश्वविद्यालय ने इस गांव  को गोद लिया है। ग्राम बिलारा के सामुदायिक केंद्र में आयोजित किए गए इस स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने पहुंचकर स्वास्थ संबंधी जानकारियां हासिल कीं।

     

    इस स्वास्थ शिविर के दौरान गांव की 52 महिलाओं और 12 बच्चों के स्वास्थ की जांच की गई। गर्भवती माताओं, किशोरियों और बच्चों को मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम, शिशु स्वास्थ पोषण कार्यक्रम एवं टीकाकरण की जानकारी प्रदान की गई।

     

    स्वास्थ्य कैंप में मुख्य अतिथि के तौर सम्मिलित विदिशा की सी.एम.ओ डॉ. शशि ठाकुर ने  लोगों को मध्य प्रदेश शासन की स्वास्थ्य संबंधी समस्त योजनाओं की जानकारी दीं। सांची विश्वविद्यालय ने इस ग्राम में क्रीड़ा, योग, दक्षता प्रोत्साहन एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता को लक्ष्य बनाया है।

     

    इसी के अंतर्गत प्रथम चरण में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया।  इस दौरान स्वास्थ शिविर में पहुंची एक क्षय रोगी किशोरी के इलाज का समस्त व्यय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आचार्य डॉ यज्ञेश्वर एस. शास्त्री ने उठाने का फैसला किया है। 

     

    इस स्वास्थ शिविर में ग्रामवासियों को क्षय रोग और कुष्ठ रोगों के संभावित रोगियों को उपचार के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान कुलपति आचार्य प्रो. यज्ञेश्वर एस शास्त्री एवं मुख्य अतिथि डॉ. शशि ठाकुर ने फल वितरण भी किया। विश्वविद्यालय की डॉ. रितु सक्सेना और डॉ अंजलि दुबे एवं नर्सिंग स्टाफ सहित समस्त कर्मचारियों ने शिविर के आयोजन में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया।

     

     

  • साधरण परिषद की तीसरी बैठक - सांची विश्वविद्यालय को 10 करोड़ की संचित निधि देगी सरकार

    दिनांक 20-07-2018

    • - साधारण परिषद की बैठक में कर्मचारियों को पेंशन एवं उपादान को भी मंज़ूरी

     

    सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की साधरण परिषद की मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।  प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में विश्वविद्यालय परिसर निर्माण हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री जी ने विश्वविद्यालय की संचित निधि के लिए 10 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का भी फैसला किया। 

     

    विभिन्न देशों के अध्ययन केन्द्र हेतु विश्वविद्यालय को आवंटित भूमि से लगी अतिरिक्त 20 एकड़ भूमि भी उपलब्ध कराने पर बैठक में सहमति बनी। साधारण परिषद ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों  के लिए पेंशन एवं उपादान सुविधा देने का भी निर्णय लिया। विवि के गैर अकादमिक सेवकों के लिए सातवें वेतनमान को भी मंजूरी दी गई। 

     

    इस बैठक में माननीय मुख्यमंत्री के अलावा संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेंद्र पटवा, मुख्य सचिव श्री बी पी सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव,  प्रमुख सचिव वित्त श्री मनोज गोविल, आयुक्त एवं पदेन सचिव उच्च शिक्षा श्री अजीत कुमार, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज के चेयरमैन प्रो  कपिल कपूर, NCERT के पूर्व अध्यक्ष श्री जे एस राजपूत, भारतीय दार्शनिक  अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष श्री एस आर भट्ट, महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका के अध्यक्ष बेनेगला उपथिसा नायका थेरो मौजूद रहे। साधारण परिषद के सदस्यों का परिषद के सदस्य सचिव और सांची विवि के  कुलपति आचार्य प्रो यजनेश्वर शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में सांची विवि के कुलसचिव श्री अदिति कुमार त्रिपाठी भी मौजूद थे।

     

  • साँची विश्वविद्यालय में अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर कार्यशाला

    दिनांक 21-06-2018

    • - योगनिद्रा एवं अंतर्मौन का कराया अभ्यास

     

    साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के बारला, जिला रायसेन स्थित परिसर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 21 से 25 जून, 2018 तक चलने वाली पॉंच दिवसीय 'योग' कार्यशाला का शुभारम्‍भ भी हुआ। कार्यशाला में प्रथम दिवस 'विश्‍वयोग' कार्यक्रम के अन्‍तर्गत योगनिद्रा एवं अंतर्मौन के प्रथम स्तर, योगाभ्यास के सामान्य नियम, लाभ एवं सावधानियों पर चर्चा की गई। 'अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस' का शुभारम्‍भ कुलपति आचार्य डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री द्वारा वैदिक मन्त्रोच्चारण एवं उद्बोधन के साथ हुआ।

     

    'विश्‍व‍योग' के द्वितीय एवं तृतीय स्‍तर में योगनिद्रा एवं अंतर्मौन का अभ्यास कराया गया। जिसमें विश्‍वविद्यालय के योग विभाग के सहायक प्राध्‍यापक डॉ उपेन्‍द्रबाबू खत्री ने ' मन से पार अर्थात् मन से अमन की यात्रा' विषय में बताया कि मन के धरातल पर ही संसार की सारी समस्याऍं उत्पन्न होती हैं। यदि मन को योगनिद्रा एवं अंतर्मौन के अभ्यास से तनाव, राग, द्वेष, क्रोध, घृणा आदि के अन्तरद्वन्द्वों से शांत कर अंतर्मुखी बनाया जाय तो मन के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन की समस्याओं का समाधन भी हो सकता है और मनुष्य पूर्ण आनन्द और उत्साह एवं सुखमय जीवन निर्वाह कर सकता है।

     

    योग विभाग के सहायक प्राध्‍यापक डॉ0 शाम गनपत तिखे ने आसन, प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाओं का प्रदर्शन एवं अभ्‍यास उपस्थित लोगों से कराया।  योग कार्यक्रम में सॉंची विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. यज्ञनेश्वर एस. शास्त्री, योग विभाग एवं विश्‍वविद्यालय के विभागों के प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों एवं आस पास के क्षेत्र से आये हुये अनेक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागी शामिल हुये।

     

     

  • बिना पिल और बिना बिल करें बीमारियों का इलाज: प्रकृति की सीख

    दिनांक 17-04-2018

    • - समन्वय भवन में "Medicine Free Life" पर डॉ प्रवीण चोरड़िया का वक्तव्य

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के समन्वित चिकित्सा केंद्र के आयोजन "Medicine Free Life" में जाने-माने सर्जन डॉ प्रवीण चोरड़िया ने दवा मुक्त जीवन के कुछ सूत्र बताएं। समन्वय भवन में आयोजित इस व्याख्यान की शुरूआत में डॉ. चोरड़िया ने कहा कि पिछले दरवाजे से जंकफूड, मैदा, शक्कर और सफेद नमक जैसे चोर हमारे शरीररूपी घर में घुस गए और हमारे स्वास्थ्य पर सेंध लगा दी। ऐसे ही कई अन्य अननोन अननोन डेविल्स हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। डॉ चोरडिया कहते है कि हम सभी को एक ही बीमारी हो गई है, Nature deficiency disorder  यानि हम प्रकृति से दूर हो गए है। दस साल पहले एलोपेथी से नाता तोड़ चुके डॉ. चोरड़िया का शरीर और स्वास्थ्य से जुड़े हर सवाल पर एक ही जवाब होता है ‘ANSWER’। ऑन्सर (ANSWER) ग्रुप में काम करने वाला डॉक्टर्स हैं, इनमें से एक भी डॉक्टर का साथ छोड़ा तो बाकी सभी भी काम नहीं करेंगे। 

     

    क्या है ऑन्सर (ANSWER)

    A – एअर ( शुद्ध और ताजी हवा में सांस लें)

    N – न्युट्रिशन ( जैविक खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल शुरू और शक्कर, मैदा, रिफाइंड ऑइल से दूरी)

    S – सनलाइट ( लगभग 85 प्रतिशत जनसंख्या विटामिन डी की कमी से जूझ रही है)

    W – वॉटर ( क्लोरिन, फ्लोरिन और आरओ पानी से गुड बैक्टिरिया को मारने का काम करते हैं। सूरज की रोशनी में बहने वाले प्राकृतिक पानी का इस्तेमाल करें।)

    E – एक्सरसाइज (कार्डियो, योगा और मसल ट्रेनिंग।)

    R – रेस्ट (शरीर को बायोलॉजिकल क्लॉक के हिसाब से चलाएं और आराम करें)

     

    शरीर के बिगड़े स्वरुप के लिए यू टर्न की बात करते हुए उन्होने कहा कि बॉडी हिल्स ऑन इट्स ऑन...। उन्होने कहा कि मैंने हमारे शरीर के निर्माता (प्रकृति) से पूछा कि शरीर में खुद ही हील होने की क्षमता है तो क्यों हम बीमारियों से घिरे हुए हैं। प्रकृति ने जवाब दिया- ब्रेकेट में ‘टर्म्स एंड कंडिशंस अप्लाई भी तो लिखा है।‘  तुम्हें याद है जब बचपन में तुम बीमार होते थे तो दादी डॉक्टर के पास नहीं बल्कि किचन की ओर दौड़ती थी, क्योंकि वहां स्वस्थ जीवन का खजाना होता है। एक रामबाण नुस्खा देते हुए उन्होने कहा कि हमें स्वस्थ रहना है तो आदमी की बनाई चीजों की बजाय प्रकृति निर्मित चीजों को ही भोजन का हिस्सा बनाना होगा।

     

    डॉ चोरडिया ने कहा कि मैंने अपनी एलोपैथी की पढ़ाई और प्रेक्टिस में कभी पेस्टिसाइड्स के खिलाफ एक भी चैप्टर नहीं पढ़ा, जबकि पेस्टिसाइड्स पूरी तरह से हमारी जीवन-शैली का हिस्सा बन चुके हैं। एलोपेथी समस्या को जड़ से समाप्त नहीं करती, बल्कि बैंडेज का काम करती है। आजकल हर बीमारी के समाधान में सबसे पहले एंटिबायोटिक दिया जाता है। मैं एंटिबायोटिक का समर्थक बिल्कुल नहीं हूं, बल्कि जीव-जंतुओं को प्रणाम करता हूं। हमारी लाइफस्टाइल कुछ ऐसी हो गई है कि हम सुबह से लेकर शाम तक केवल बैक्टिरिया को खत्म करने के बारे में ही सोचते रहते हैं। हम केमिकल सेंडविच बन गए हैं। बिना पिल और बिना बिल के डॉ चोरडिया ने बताया कि हमें प्रकृति से जुड़ने और खुद का डॉक्टर स्वयं बनने की जरूरत है। उन्होने मेडिसिन के जन्मदाता हिप्पोक्रेटिस का उद्धरण सुनाते हुए उन्होने कहा कि अगर आप अपने डॉक्टर खुद नहीं है तो आप मूर्ख है। 

     

    कार्यक्रम की शुरुआत में सांची विवि के कार्यक्रम में विवि के कुलपति आचार्य प्रो डॉ यज्नेश्वर शास्त्री ने कहा कि हमें जैविक भोजन और रसायन मुक्त दूध के साथ प्रकृति की ओर फिर से बढ़ना चाहिए। उन्होने कहा कि हमें किसानों को जैविक अनाज उगाने को प्रोत्साहित करना चाहिए। विवि के कुलसचिव श्री राजेश गुप्ता ने विवि के समन्वित चिकित्सा केंद्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी विकृति को ठीक करने में प्रकृति का योगदान समझकर उसपर काम करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन प्रभाकर पांडे ने किया व स्वागत भाषण डॉ अखिलेश सिंह ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन विवि के डीन प्रो नवीन मेहता ने किया।  

     

     

  • म्यान्मार की प्रोफेसर ने की सांची विश्वविद्यालय के छात्रों से भेंट

    दिनांक 22-03-2018

    • - प्रो. सॉव-ह-टुट बिहार के मगध विश्वविद्यालय में हैं कार्यरत्
    • - म्यान्मार के बारे में दी छात्रों को जानकारी
    • - थेरवाद बौद्ध धर्म का अभ्यास किया जाता है म्यान्मार में

     

    म्यान्मार के अंतरराष्ट्रीय संबोधि संस्थान की प्रो. डॉ. संदार सॉव-ह-टुट ने  सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के प्राध्यपकों और छात्रों और शोधार्थियों से भेंट की। डॉ सॉव-ह-टुट ने विश्वास जताया है कि म्यान्मार के अंतरराष्ट्रीय संबोधि संस्थान और सांची विश्वविद्यालय के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम तथा फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम को लेकर सहमति बन सकती है।

     

              डॉ. सॉव-ह-टुट ने छात्रों से भेंट के दौरान बताया कि बिहार के मगध विश्वविद्यालय से अगर सहमति बनती है तो यहां पर स्नातक स्तर की पढ़ाई कर रहे छात्र सांची विश्वविद्यालय में एम.ए, व अन्य पाठ्यक्रमों में सम्मिलित होकर लाभ उठा सकते हैं। डॉ. सॉव-ह-टुट ने सांची विवि के छात्रों को म्यान्मार में उच्च शिक्षा के स्तर के विषय में बताया।

     

              सांची विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे विएतनामी छात्रों से मुलाकात के दौरान डॉ. सॉव-ह-टुट ने बताया कि म्यान्मार में बौद्ध दर्शन की शाखा थेरवाद का अभ्यास किया जाता है। शोध की गुणवत्ता के स्तर को कायम रखने के उद्देश्य से सांची विश्वविद्यालय में प्रत्येक वर्ष एम.ए,एम.फिल तथा पी.एच.डी के छात्रों का चयन प्रेवश परीक्षा एवं साक्षात्कार के माध्यम से होता है। यह परीक्षा प्रत्येक वर्ष जून-जुलाई माह में होती है। लेकिन विदेशी छात्रों को प्रवेश परीक्षा से छूट होती है, उन्हें सिर्फ साक्षात्कार परीक्षा में सम्मिलित होना होता है।

     

              सांची वि.वि पी.एच.डी के प्रत्येक छात्र को रु.14000 प्रतिमाह तथा एम.फिल के प्रत्येक छात्र को रु.8000 प्रतिमाह की छात्रवृत्ति देता है। इसी तरह एम.ए के मेरिट पाने वाले छात्र को भी प्रत्येक माह रु. 3000 की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

     

              डॉ. सॉव-ह-टुट ने सांची विश्वविद्यालय में छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के बारे में जानकर काफी उत्साहित थीं। छात्रों तथा प्राध्यापकों के भेंट के उपरांत उन्होंने आशा जताई की बड़ी संख्या में म्यान्मार के छात्र सांची विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं।

     

              डॉ. सॉव-ह-टुट म्यान्मार के अंतरराष्ट्रीय संबोधि संस्थान में कार्यरत् हैं और वर्तमान में बिहार बोधगया के मगध विश्वविद्यालय के बौद्ध दर्शन विभाग में विज़िटिंग फैकल्टी के तौर पर सेवाएं दे रही हैं।

     

         

     

  • थाइलैंड के सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय और सांची विश्वविद्यालय के बीच होगा अनुबंध

    दिनांक 15-03-2018

    • - दोनों विश्वविद्यालय के बीच जल्द होगा MoU
    • - सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों का दल पहुंचा सांची विश्वविद्यालय
    • - थाई भाषा के 50% शब्द संस्कृत भाषा पर आधारित

     

          सॉंची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय और थाइलैंड के सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय के बीच सहयोग हेतु MoU होने जा रहा है। इसी सिलसिले में सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रो. सोमबट मंगमेसुकसीरी और हिंदी विभाग के प्रो. परामर्थ खाम-एक सांची विवि का दौरा किया एवं छात्रों को व्याख्यान भी दिया। व्याख्यान के दौरान उन्होंने बताया कि सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय में 6000 छात्र पढ़ाई करते हैं। इस विश्वविद्यालय में संस्कृत, विज्ञान, फार्मेसी, मैनेजमेंट, कला, पेंटिंग, संगीत, इंटीरियर डिज़ाइनिंग, आर्कियोलॉजी और अन्य विषय पढ़ाए जाते हैं।

     

                प्रो. सोमबट ने बताया कि इस MoU के तहत सांची विश्वविद्यालय और सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय के छात्र एक दूसरे के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के विभिन्न विषयों का अध्ययन, शोध इत्यादि का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा दोनों ही विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक एक दूसरे के विश्वविद्यालयों में अध्यापन का कार्य कर सकेंगे ताकि दोनों देशों के छात्र लाभान्वित हो सकें।

     

                प्रो. सोमबट के अनुसार थाइलैंड में संस्कृत भाषा (स्पोकन संस्कृत) तथा संस्कृत व्याकरण के विषयों को लेकर कई संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय संस्कृत में एम.ए और पी.एच.डी के पाठ्यक्रमों को केंद्र में रखता है क्योंकि थाइलैंड की 96 प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। यह आबादी थाई भाषा का उपयोग अपनी दिनचर्या में करती है और थाई भाषा के 50% शब्द मूलत: संस्कृत भाषा से निर्मित हुए हैं।

     

                सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय के प्रो. परामर्थ खाम-एक के अनुसार उनके विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा भी पढ़ाई जाती है लेकिन इस विषय पर प्राथमिक स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। उनके अनुसार सिल्पाकोरन विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में भी सांची विश्वविद्यालय के साथ हाथ मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार है।

     

                हिंदी के प्रो. परामर्थ के अनुसार भारतीय सांस्कृतिक अनुसंधान परिषद के साथ थाइलैंड के सांस्कृतिक संबंध हैं जिसके तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, विज़िटिंग प्रोफेसर्स के तौर पर एक-दूसरे के देशों में जाकर कक्षाएं ले सकते हैं ताकि ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान हो सके।

     

      

     

  • आईआईटी खड़गपुर ओपन टेनिस टूर्नामेंट के टॉप फोर में रहा सांची विश्वविद्यालय

    दिनांक 07-03-2018

    •  - डबल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचे, सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची टीम

     

           आईआईटी खड़गपुर ओपन टेनिस टूर्नामेंट के डबल्स मुक़ाबले में सांची विश्वविद्यालय की टीम  ने सेमीफाइनल तक का सफर किया। सेमीफाइनल मुक़ाबले में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व कर रहे सहायक निदेशक (खेल) श्री विवेक पांडे और आईआईटी खड़गपुर के एग्रीकल्चर विभाग के प्रो. राजेंद्र सिंह की टीम ने आईआईटी खड़गपुर के छात्र कुणाल पुंज और अखिल अडानू की जोड़ी को कड़ी टक्कर दी और मुक़ाबला 5-6 पर समाप्त हुआ। डबल्स मुक़ाबले के पहले दौर में इस जोड़ी ने आईआईटी खड़गपुर के कर्मचारियों मोहन और श्रीनू की जोड़ी को 5-1 से हराया। दूसरे दौर में विवेक और प्रो. राजेंद्र सिंह की जोड़ी ने 5-1 के स्कोर से आईआईटी इंदौर के रीतेश गुच्छैत और आईआईटी भुवनेश्वर के एसोसिएट प्रोफेसर अमरजीत की जोड़ी को हराया।

     

                सिंगल्स मुकाबले में सांची विश्वविद्यालय के सहायक निदेशक (खेल) श्री विवेक पांडे क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहे। विवेक, क्वार्टर फाइनल मुक़ाबले में आईआईटी खड़गपुर के बॉयज़ टीम के कप्तान कुणाल पुंज से 4-5 से हार गए। इस वर्ष फाइनल्स में कुणाल ने टीसीएस कोलकाता के वी.वी अनुराग को हराकर सिंगल्स ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाया। कुणाल पिछले वर्ष आईआईटी खड़गपुर ओपन के सिंगल्स विजेता भी रहे थे।

     

                आईआईटी खड़गपुर हर साल अपने कैंपस में इस ओपन टेनिस टूर्नामेंट का आयोजन करता है जिसमें देश के शिक्षण संस्थानों एवं कॉर्पोरेट जगत के खिलाड़ियों को आमंत्रित किया जाता है। प्रत्येक वर्ष यह टूर्नामेंट दो श्रेणी में आयोजित किया जाता है। ओपन जिसमें किसी भी उम्र का खिलाड़ी सम्मिलित हो सकता है जबकि वेटरेन्स श्रेणी में 55 वर्ष से ऊपर के ही खिलाड़ी सम्मिलित हो सकते हैं।

     

      

     

  • सांची विश्वविद्यालय के उद्यान में खिले 60 किस्म के फूल

    दिनांक 28-02-2018

    • - विश्वविद्यालय परिसर का बाग़ गुलज़ार
    • - बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे बाग़ को देखने
    • - औषधीय और खुशबूदार पौधों के भी उद्यान
    • - आध्यात्मिक उद्यान भी विकसित किया गया
    • - विलुप्त हो रही पेड़-पौधों की प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन कर रहा सांची विश्वविद्यालय
    • - पानी में लगाए जाने वाले पौधे भी लगाए गए परिसर में

     

                सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के बारला स्थित अकादमिक परिसर में इन दिनों फूलों की बहार है। विश्वविद्यालय परिसर के चारों तरफ फूलों की तकरीबन 60 से अधिक किस्में पल्लवित हो रही हैं। हर तरफ रंग-बिरंगे फूल ही फूल खिले हैं जो फिज़ां में खुशबू बिखेर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इन फूलों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। इन फूलों के अलावा विश्वविद्यालय में औषधीय गार्डन भी विकसित किया गया है जिनमें औषधीय पौधों के अलावा एरोमैटिक(खुशबू देने वाले) पौधे  भी लगाए गए हैं।

     

                सांची विश्वविद्यालय के सहायक निदेशक(उद्यानिकी) श्री कृपाल सिंह वर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में ही एक आध्यात्मिक उद्यान, नवग्रह उद्यान एवं राशि उद्यान भी विकसित किए गए हैं जहां पर ऐसे पेड़ों को लगाया गया है जिनका अलग-अलग धर्म और दर्शन में ज़िक्र किया गया है। पीपल, बरगद और समी के पेड़ों की किस्मों के साथ-साथ पाम के वृक्ष, क्रिसमस ट्री, खजूर के वृक्ष इत्यादि पेड़ों की प्रजातियों को सांची विश्वविद्यालय में ही ग्राफ्ट कर तैयार किया गया है।

     

                सांची विश्वविद्यालय अपनी नर्सरी में कई विलुप्त हो रही पेड़-पौधों की प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास कर रहा है। विश्वविद्यालय की नर्सरी में चिरौंजी, सफेद और पीले पलाश की प्रजातियों को लगाया गया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में Ornamental Plants अलंकृत पौधे जैसे मोरपंखी, एकजोरा, बॉटल ब्रश, कचनार, चांदनी जैसे पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों को घरों की सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

     

                नर्सरी में फूलों की 60 विभिन्न वेरायटियों(किस्म) में लाइनेरिया, फ्लॉक्स, केलेंड्यूला, स्वीट सुल्तान, स्वीट विलियम, पॉपी, ऑर्क टोटिस, कैलिफोरनिया पॉपी, एनट्रेनियम, डहेलिया, सूरजमुखी और हैरीक्राइसम प्रमुख हैं।

     

                सांची विश्वविद्यालय की नर्सरी में जलीय पौधों को भी लगाया गया है। जिनमें सिंघाड़ा, कमल और अमेज़न लिलि प्रमुख हैं।

     

      

     

  • रूस में बौद्ध दर्शन का असर, सांची विवि में डॉक्युमेंट्री का प्रदर्शन

    दिनांक 16-02-2018

    • - रुस में बौद्ध धर्म और भारत को लेकर उत्साह, रुस में 15 लाख बौद्ध
    • - लियो टॉल्सटॉय के लेखन में भी था बौद्ध दर्शन का असर
    • - कई विपश्यना मेडिटेशन सेंटर हैं रूस में

     

    सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में रूस में बौद्ध दर्शन के असर और फैलाव पर रुस में पत्रकार रहे श्री अजय कमलाकर की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। डॉक्यूमेंट्री के बाद अजय कमलाकर ने बताया कि रूस के तीन इलाकों में बौद्ध धर्म के करीब 15 लाख लोग मुख्यत: बसते हैं। बौद्ध धर्म भारत, चीन, मंगोलिया, सेंट्रल एशिया होते हुए रूस पहुंचा था। डॉ कमलाकर ने अपनी बनाई हुई इस छोटी सी डॉक्यूमेंट्री में यह भी बताया है कि कैसे इन इलाकों को देखने पर यह महसूस ही नहीं होता कि रूस में भी हिमालय और तिब्बत जैसा इलाका है। रूस मे यूरीयाटिया, ट्यूबा और कलानीसिया के स्वायत्त क्षेत्रों में मुख्यत: महायान बौद्ध धर्म के मानने वाले रहते हैं।

     

    श्री अजय के अनुसार रूस में कम्यूनिस्ट शासन में किसी भी धर्म को मानने पर पाबंदी थी। लेकिन 1950 के बाद से ही रूस में धर्म पर लगाई गई पाबंदियां हटाई गईं और हर एक धर्म का मानने वाला पूरी आजादी से अपने धर्म की प्रेक्टिस कर सकता है। उनका कहना है  रूस में कई सारे विपश्यना मेडिटेशन सेंटर खुल गए हैं जो कि लोगों को ध्यान करना सिखाते हैं। उन्होने सांची विवि और रुस के बौद्ध संस्थानों के बीच संबंध विकसित करने में सहयोग की भी बात कही।

     

    डॉक्यूमेंट्री और बौद्ध दर्शन पर आधारित कई सारे प्रश्नों के जवाब में उन्होंने बताया कि रूस के विश्वविख्यात लेखक लियो टॉलस्टॉय के बारे में भी कहा जाता है कि उन्होंने बौद्ध धर्म का काफी गहराई से अध्ययन किया था और उसकी शिक्षाओं को अपने प्रतिदिन की दिनचर्या में शामिल किया था।

     

    विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच श्री कमलाकर ने बताया कि रूस के ज़ार निकोलस द्वितीय के शासन के दौरान बौद्ध भिक्षुओं को विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान आमंत्रित किया जाने लगा था। उनका कहना था कि ज़ार निकोलस ने 1927 में समाधि भी ली थी। 2002 में उसकी समाधि को जब खोदा गया तो अध्ययन करने वाले डॉक्टरों का कहना था कि ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो 24 घंटे पहले ही इस शख्स की मौत हुई हो।

     

    सांची विश्वविद्यालय में छात्रों की जिज्ञासाओं का जवाब देने वाले श्री अजय कमलाकर लेखक एवं पत्रकार हैं।  2003-2007 के दौरान रूस की एक पत्रिका "रशिया बियॉन्ड द हेडलाइंस" के संपादक रहे। उन्होंने 2011-2017 के दौरान टाइम्स ग्रुप के समाचार पत्र सखालिन टाइम्स का संपादन भी किया। डॉ अजय रूस, श्रीलंका और स्वीडन में बौद्ध दर्शन, हिंदुत्व, व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञता रखते हैं। पिछले दिनों उनकी किताब Globetrotting for Love and Other Stories from Sakhalin Island भी प्रकाशित हुई है।

     

      

     

  • नागालैंड के 22 छात्र पहुंचे सांची विश्वविद्यालय

    दिनांक 12-02-2018

    • - एक दूसरे से साझा की संस्कृति और आचार-विचार
    • - शिक्षा, कला और मौसम पर भी हुई बातचीत
    • - सांची विश्वविद्यालय के छात्रों को नागालैंड आमंत्रित किया
    • - प्रधानमंत्री के एक भारत-श्रेष्ठ भारत  कार्यक्रम के तहत म.प्र की पहल

     

    नागालैंड के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे 22 छात्रों का एक दल सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय पहुंचा। इन छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्राकृतिक वातावरण के अलावा विभिन्न कक्षाओं में पहुंचकर सांची विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मुलाकातें कीं और शिक्षा संबंधी विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इन छात्रों ने एक दूसरे के साथ अपनी संस्कृति, आचार-व्यवहार, कला, शिक्षा, मौसम जैसे विषयों पर बातचीत की। नागालैंड के छात्रों ने भी सांची विश्वविद्यालय के छात्रों को अपने प्रदेश में आमंत्रित किया।

     

    दरअसल, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "एक भारत श्रेष्ठ भारत" पहल के तहत देश के विभिन्न राज्यों के बीच आपसी सामंजस्य बढ़ाने के उद्देश्य से कई राज्यों को एक साथ जोड़ा गया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश का समन्वय उत्तर पूर्वी राज्यों मणिपुर और नागालैंड से स्थापित किया गया है। आपसी संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से तीनों राज्य आपस में पर्यटन, तकनीकी, आयुष, पुलिस और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक दूसरे के विचार साझा करेंगे। मध्य प्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग को इस कार्यक्रम के विनिमय के लिए नोडल संस्था नियुक्त किया है।

     

    रायसेन स्थित बारला अकादमिक परिसर में पहुंचे नागालैंड के छात्रों के दल ने सांची विश्वविद्यालय के छात्रों एवं प्राध्यापकों से विभिन्न पाठ्यक्रमों, चयन प्रक्रिया, छात्रवृत्ति इत्यादि के संबंध में जानकारियां ली। नागा छात्रों का यह दल मध्य प्रदेश के विभिन्न एतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण कर रहा है। प्रधानमंत्री के "एक भारत श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम के तहत मध्य प्रदेश से पर्यटन, तकनीक, आयुष, मेडिकल, पुलिस और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न दल नागालैंड और मणिपुर जाएंगे। नागालैंड के छात्रों के दल की ही तरह मणिपुर के छात्रों का दल भी मध्य प्रदेश आएगा।

     

     

  • आदि शंकराचार्य की एकात्‍म यात्रा पर परिचर्चा  

     

    • - 'निष्काम कर्म योग से ही भारत राष्ट्रीय सूत्र में बंधा'
    • - 'आदि शंकराचार्य ने जातिवाद के विरुद्ध प्रखर स्वर उठाए'
    • - 'शास्त्र रचना का रूप ही आदि शंकराचार्य ने दिया था'

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में बुधवार को ''जगतगुरु आदि शंकराचार्य जी और एकात्‍म यात्रा'' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। विश्‍वविद्यालय के बारला स्थित अकादमिक परिसर में परिचर्चा के दौरान सहायक प्राध्यापक श्री विश्व बंधु ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने निष्काम कर्म योग के माध्यम से भारत को राष्ट्रीय सूत्र में बांधने का प्रयास किया।

     

    उनका कहना था कि जगदगुरु आदि शंकराचार्य के प्रयासों से ही भारत सांस्कृतिक सूत्र में एक रूप हो सका। श्री विश्वबंधु का कहना था कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को अद्वैतवाद के तत्व द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करते हुए जातिवाद के विरुद्ध प्रखर स्वर उठाए।

     

    सहायक प्राध्यापक श्री नवीन दीक्षित ने कहा कि समाज के बांटने वाली शक्तियां भगवान बुद्ध और आदि शंकराचार्य को एक दूसरे के विरोधी की तरह चित्रित करती हैं जबकि दोनों की ही शिक्षाएं पूर्ण रूप से एकात्म होने का संदेश देती हैं।

     

    परिचर्चा का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सह प्राध्यापक श्री नवीन मेहता ने कहा कि शास्त्र रचना का स्वरूप किस तरह का होना चाहिए यह आदि शंकराचार्य ने ही सर्वप्रथम बताया था।

     

    एकात्म यात्रा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 19 दिसंबर 2017 से 22 जनवरी 2018 तक की जा रही है। इस यात्रा का समापन 22 जनवरी को ओंकारेश्‍वर में होगा। इस यात्रा के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान संपूर्ण राष्ट्र को एक संस्कृति में एकात्म करने का प्रयास कर रहे हैं। इस यात्रा के ज़रिए भारत की भाषिक और शारीरिक विविधता के साथ-साथ विचार को एकात्म किये जाने के प्रयास हैं।

     

  • सांची विश्वविद्यालय के 8 छात्र यूजीसी नेट में चयनित

     

    सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के 8 छात्र जून 2017 की यूजीसी नेट परीक्षा में चयनित हुए हैं। सांची विश्वविद्यालय के इन सभी 8 छात्रों ने नवंबर 2017 में नेट की परीक्षा दी थी। यह कामयाबी हासिल करने वाले छात्रों में से चार योग विभाग के छात्र हैं जबकि दो हिंदी के तथा एक संस्कृत और एक बौद्ध अध्ययन विभाग का है। नेट यानी नेशनल एलीजीबिलिटी टेस्ट में चयनित होने पर कोई भी छात्र/शोधार्थी विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज स्तर पर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन के लिए पात्र हो जाता है।

     

    नेट परीक्षा में कामयाब होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य प्रोफेसर याज्ञेश्वर शास्त्री ने इन छात्रों को बधाई दी। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी अपनी सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय में एम.फिल और पी.एच.डी के पाठ्यक्रमों के प्राध्यापकों को दिया है। इन छात्रों का कहना है कि प्राध्यापकों द्वारा दोनों ही पाठ्यक्रमों के दौरान ही उन उन्हें नेट की परीक्षा की तैयारी की प्रेरणा दी जाती रही। पिछले साल भी सांची विश्वविद्यालय से 3 छात्रों ने यूजीसी नेट की परीक्षा में सफलता हासिल की थी।

     

    सांची विश्वविद्यालय पी.एच.डी करने वाले प्रत्येक छात्र को प्रतिमाह 14 हज़ार रुपए एवं एम.फिल करने वाले प्रत्येक छात्र को 8 हज़ार रुपए की स्कॉलरशिप देता है तथा नेट जैसी परीक्षाओं के लिए विशेष अध्ययन क्लासेस भी आयोजित करता है।

    इस साल जिन छात्रों का चयन यूजीसी नेट में हुआ है उनकी सूची निम्नानुसार है-

     

    क्र.

    नाम

    विभाग

    1.

    रोशन कुमार भारती

    एम.फिल(योग)

    2.

    भानू प्रताप बुंदेला

    एम.फिल(योग)

    3.

    बृजेश नामदेव

    एम.एस.सी(योग)

    4.

    धनंजय कुमार जैन

    पी.एच.डी(योग)

    5.

    अनीश कुमार

    पी.एच.डी(हिंदी)

    6.

    कपिल कुमार गौतम

    एम.फिल(हिंदी)

    7.

    आशीष आर्य

    पी.एच.डी(संस्कृत)

    8.

    लेखराम सेलोकर

    पी.एच.डी(बौद्ध अध्ययन)

     

 

 

Press Releases - 2017

 

  • कैलाश सत्यार्थी का विशिष्ट व्याख्यान - बच्चों से अनैतिकता की महामारी के खिलाफ संपूर्ण महायुद्ध का ऐलान

     

    भारत की आत्मा को जागृत करने के लिए सांची विवि बधाई का पात्र-श्री सत्यार्थी

    बच्चों से अनैतिकता की महामारी के खिलाफ संपूर्ण महायुद्ध का ऐलान

    "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

     

    नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने आज सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से संवाद किया। मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ जारी भारत यात्रा के दौरान बारला अकादमिक परिसर पहुंचे श्री सत्यार्थी ने कहा कि कहा कि आत्मशक्ति, नैतिकता और सच्चाई का बल संख्या बल से ज्यादा ताकतवर होता है और सांची विश्वविद्यालय भारत की आत्मा को जागृत करने का कार्य कर रहा है जिसके लिए विवि को बधाई दी जाना चाहिए। विवि के छात्रों के आग्रह पर "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" विषय पर बोलते हुए उन्होने कहा कि अनैतिकता और यौन हिंसा की बढ़ती महामारी देश के सामाजिक मूल्यों को खोखला कर रही जिसके खिलाफ खड़े होने का वक्त आ गया है। भारत यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें डर छोड़कर अभय बनना होगा और इसीलिए उन्होने बच्चों, लड़कियों और अबलाओं की सुरक्षा के लिए संपूर्ण महायुद्ध छेड़ा है। कन्याकुमारी के शुरू हुई भारत यात्रा के साथ सांची विवि पहुंचे श्री सत्यार्थी ने कहा कि हम उदासीन हो गए हैं जिसकी वजह से हमारे अंदर आत्महंतक निष्क्रियता (सुसाइडल पैसिविटी) बढ़ती जा रही है। उन्होंने हवाला दिया कि पड़ोस में  लगी आग के बाद भी हम ये सोचकर निष्क्रिय बने रहते हैं कि आग हमारे घर में नहीं लगी है और यह प्रवृत्ति हमें समाप्त किए जा रही है।

     

    सुबह 10.30 बजे बारला अकादमिक परिसर पहुंचे श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि हमें डर, चुप्पी निष्क्रियता और उदासीनता को पीछे छोड़कर भयमुक्त भारत के रुप में नए भारत के निर्माण की शुरुआत करना चाहिए। वेद और पुराणों का हवाला देते हुए श्री सत्यार्थी ने कहा कि परहित और परपीड़ा को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है और इसीलिए मानव कल्याण और भय के खिलाफ खड़े होना सबसे बड़ा धर्मयुद्ध है। उन्होने सभी छात्रों एवं मौजूद लोगों को संकल्प दिलाते हुए सभी के अंदर बैठे बाल शोषण, बाल हिंसा  और अनाचार रुपी राक्षस के वध का आव्हान किया। श्री सत्यार्थी के वक्तव्य से छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों को सेवा, करुणा एवं बाल समस्याओं के क्षेत्र में एक नोबल पुरस्कार विजेता के अनुभवों का सीधा लाभ प्राप्त हुआ। श्री कैलाश सत्यार्थी ने बताया कि नोबल पुरस्कार मिलने के बाद उन्होने अपना नोबल पुरस्कार राष्ट्रपति भवन पहुंचकर देश को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस नोबल पुरस्कार की सुरक्षा के साथ पूरा देश इस संकल्प में है कि वो बाल अपराध के खिलाफ उनकी इस यात्रा में उनके साथ है।

     

    कार्यक्रम के अध्यक्ष औऱ विवि के कुलपति प्रो यज्नेश्वर शास्त्री ने श्री सत्यार्थी का स्वागत करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का राष्ट्र संत करार दिया। उन्होने कहा कि शांति, करुणा, मैत्री और राष्ट्र निर्माण का संदेश बुद्ध ने भी दिया था और उनके पदचिन्हों पर चलकर श्री सत्यार्थी राष्ट्र निर्माण में लगे हुए है। कार्यक्रम में एडीजी और कुलसचिव श्री राजेश गुप्ता एवं विवि की डीन श्रीमति सुनंदा शास्त्री भी मौजूद रही। धन्यवाद प्रो नवीन मेहता ने किया।

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनरुद्धार और उच्च कोटि के शोध को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विश्वविद्यालय है। सांची विश्वविद्यालय का वैकल्पिक शिक्षा केंद्र, शिक्षा के विभिन्न मॉडलों और पद्धतियों पर कार्य कर रहा है। विभिन्न शिक्षा पद्धतियों पर शोध के बाद विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक शिक्षा पर पाठ्यक्रम भी तैयार करेगा।

  • कैलाश सत्यार्थी का विशिष्ट व्याख्यान - "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

     

    नोबल पुरस्कार विजेता करेंगे छात्र-छात्राओं से संवाद

    "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

    5 अक्टूबर 2017, गुरुवार को विवि के बारला अकादमिक परिसर में प्रात् 9.30 बजे व्याख्यान

     

    नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी, 05 अक्टूबर को सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे। सांची विवि की विशिष्ट पद्धति और उद्देश्य से प्रभावित श्री सत्यार्थी मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ जारी भारत यात्रा के दौरान सांची विवि में विशिष्ट वक्तव्य के लिए वक्त देना स्वीकार कर लिया। सांची विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कैलाश सत्यार्थी से आग्रह किया था कि वो "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणादया और बालकविषय को अपने व्याख्यान का आधार बनाए। श्री सत्यार्थी को उपरोक्त विषय बहुत ही पसंद आया और उन्होने व्याख्यान हेतु सहमति दे दी।

     

    कैलाश सत्यार्थी सुबह 09.00 बजे विदिशा से सांची विवि के बारला अकादमिक परिसर पहुंचेंगे जहां वो छात्रों से संवाद करेंगे एवं व्याख्यान देंगे। व्याख्यान के बाद छात्र बाल अपराध और समाधान और नोबल पुरस्कार विजेता के कर्मशील जीवन से जुड़ी जिज्ञासाएं और सवाल सीधे श्री कैलाश सत्यार्थी से करेंगे।  उनके वक्तव्य से छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों को सेवा, करुणा एवं बाल समस्याओं के क्षेत्र में एक नोबल पुरस्कार विजेता के अनुभवों का लाभ मिल सकेगा।

     

    भारत यात्रा के दौरान कैलाश सत्यार्थी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के बच्चों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि बच्चों के साथ होने वाले दैहिक शोषण एवं हिंसा तथा बाल अपराध के विषय में छात्रों को जागरुक किया जा सके और बाल अपराध के प्रति छात्रों को जागरुक किया जा सके। यह यात्रा कन्याकुमारी के शुरू हुई थी जो कि नई दिल्ली में समाप्त होगी।

     

    कैलाश सत्यार्थी विदिशा ज़िले के रहने वाले हैं और उन्होंने यहीं के सम्राट अशोक इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की है। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनरुद्धार और उच्च कोटि के शोध को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विश्वविद्यालय है। सांची विश्वविद्यालय वैकल्पिक शिक्षा केंद्र, शिक्षा के विभिन्न मॉडलों और पद्धतियों पर कार्य कर रहा है। विभिन्न शिक्षा पद्धतियों पर शोध के बाद विश्वविद्यालय ने अपना पाठ्यक्रम तैयार किया है।

  • सांची विश्वविद्यालय में मना स्वच्छता पखवाड़ा

     

    आसपास की स्वच्छता के साथ आचार-विचार में भी हो शुद्ध- कुलपति प्रो शास्त्री

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कई गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। परिसर एवं भवनों की सफाई के साथ ही इस दौरान अपने आस-पास को स्वच्छ रखने एवं पर्यावरण को संरक्षित रखने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है। परिसर की सफाई के उपरांत कार्यक्रम में पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य प्रो यज्ञेश्वर एस शास्त्री ने स्वच्छता को साझा प्रयास के रुप में अपनाने की ज़रुरत बताई। उन्होने कहा कि स्वच्छता ना सिर्फ वातावरण और साधनों की होना चाहिए बल्कि हमारे विचार एवं आचार भी शुद्ध होना चाहिए। कुलपति महोदय ने पर्यावरण के महत्व को रेखांकित करते हुए पौधारोपण कर कार्यक्रम का समापन किया।

     

    इस अवसर पर स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान किए गए प्रयासों को पूरे वर्षभर जारी रखने का भी आव्हान किया गया। स्वच्छता पखवाड़ा में विश्वविद्यालय के सभी छात्र एवं अध्यापकगण द्वारा भागीदारी की जा रही है। विश्वविद्यालय अनुसंधान आयोग की पहल पर विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान ग्रीन कैंपस डे, क्लीन कैंपस डे, क्लीन हॉस्टल डे, सबसे साफ हॉस्टल रुम जैसे कई आयोजन किए गए।

  • हिंदी दिवस पर साँची विश्वविद्यालय में हिंदी का ब्लॉग लोकार्पित

     

    जिसमे सोच, विचार, चिंतन मनन हो वही भाषा है- नवल शुक्ल
    भाषा धरती पर मनुष्य का पहला औज़ार थी- नवल शुक्ल
    सफल प्रतिभागी हुए पुरस्कृत, भित्ती पत्रिका 'पारमिता' भी जारी

     

    साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्यन विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग के ब्लॉग www.subishindi.blogspot.in की शुरुआत की गई। हिंदी विभाग के ब्लॉग पर विभाग एवं विवि के छात्र एवं कर्मचारियों के आलेख, कविताएं एवं अन्य जानकारी तथा हिंदी भाषा संबंधी रुचिपूर्ण लेख प्रकाशित किए जाएंगे। 14 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह के मुख्य अतिथि एवं साहित्यकार श्री नवल शुक्ल ने कहा कि जिस भाषा में चिंतन, मनन ,सोच और व्यवहार हो वहीं भाषा है। उनके मुताबिक भाषा मनुष्य के भावों को व्यक्त करने के लिए व्यक्ति का पहला औजार थी। श्री शुक्ल ने कहा कि चेतना का स्तर स्वभाषा से ही बेहतर होगा। उनके मुताबिक प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है कि २०० शब्दों से व्यक्ति के संवाद का काम चल सकता है लेकिन भाषा व्यक्ति को विविधता और व्यापकता देती है। श्री शुक्ल ने विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की भित्ती पत्रिका 'पारमिता' को भी जारी किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी भाषा के सह प्राध्यापक प्रो नवीन मेहता ने कहा कि लोगों को चाहिए की वो भाषा को सीखे, समझे और भाषा के साथ स्वयं को भी उन्नत करें।

     

    हिंदी सप्ताह के अवसर पर बारला स्थित अकादमिक परिसर में हिंदी भाषा पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं। 12 सितंबर को निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता हुई वहीं 13 सिंतबर को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। मुख्य समारोह में कविता पाठ हुआ जिसमें छात्रों, कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप किताब उपहार में दी गई। जिन विजेताओं ने प्रथम पुरस्कार जीते उनके नाम निम्नानुसार हैं-

     

    • निबंध प्रतियोगिता- उमाशंकर कौशिक, पीएचडी छात्र योग 
    • पोस्टर प्रतियोगिता - भारत जैन, पीएचडी पैन्टिंग
    • भाषण - गौतम आर्य, एमए संस्कृत
    • कविता पाठ- स्नेहलता, पीएचडी पैन्टिंग
  • ताइवान की नानहुआ यूनिवर्सिटी में पढ़ेंगे सांची विश्वविद्यालय के खेमराज

     

    एम.ए कोर्स के लिए हुआ खेमराज का चयन
    सांची विश्वविद्यालय में चीनी भाषा डिप्लोमा के छात्र हैं खेमराज शर्मा

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र खेमराज शर्मा अब ताइवान में पढ़ाई करेंगे। उनका चयन ताइवान के नानहुआ विश्वविद्यालय में एम.ए कोर्स में हुआ है। वो नानहुआ विश्वविद्यालय में धार्मिक अध्ययन विषय पर एम.ए के साथ ही चीनी भाषा में डिप्लोमा भी करेंगे। खजुराहो के रहने वाले खेमराज शर्मा पिछले वर्ष सांची विश्वविद्यालय से चीनी भाषा में एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स कर चुके हैं। इस वर्ष उन्होंने बारला स्थित अकादमिक परिसर में चीनी भाषा के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में एडमिशन लिया था।

     

    पिछले एक माह से उनकी क्लासेस जारी थी , लेकिन ताइवान के विश्वविद्यालय में चयन के बाद अब इस पाठ्यक्रम को वो एम.ए पाठ्यक्रम के साथ नानहुआ विश्वविद्यालय से ही पूरा करेंगे। सोमवार को ताइवान के लिए रवाना हो रहे खेमराज के चयन की सबसे खास बात ये है कि उनकी पढ़ाई का खर्च या ट्यूशन फीस ताइवानी यूनिवर्सिटी वहन करेगी। नानहुआ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें रहने की सुविधा भी बगैर किसी फीस के मुहैया कराई जाएगी।

     

    इस कोर्स के लिए खेमराज का दिल्ली में नानहुआ विवि की टीम द्वारा लंबा इंटरव्यू लिया गया। इंटरव्यू में सफलता के लिए खेमराज शर्मा ने सांची विवि की चीनी भाषा की सहायक प्राध्यापक प्राची अग्रवाल के मार्गदर्शन को विशेष श्रेय दिया। उनके मुताबिक सांची विश्वविद्यालय का चीनी भाषा कोर्स ने ही उनके लिए नए रास्ते खोले। खेमराज ने कहा कि वो सर्टिफिकेट कोर्स में एडमिशन नहीं लेते तो उन्हें विदेशी विश्वविद्यालय से पढ़ाई का सुनहरा मौका नहीं मिल पाता।

  • विदेशी प्रोफेसर्स करेंगे सांची विश्वविद्यालय में अध्यापन

     

    विद्या परिषद में कई विषयों पर अहम निर्णय

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में छात्रों को कई देशों में पढ़ा चुके प्रोफेसर्स से पढ़ने का मौका मिलेगा। विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय छवि के अनुरूप सांची विश्वविद्यालय की विद्या परिषद ने इन प्रोफेसरों के सांची विश्वविद्यालय को अपनी सेवाएं देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सांची विश्वविद्यालय को बौद्ध अध्ययन पाठ्यक्रम के लिए थाइलैंड विश्वविद्यालय के श्री डियोन ओलिवर पीपुल्स तथा सामरिक अध्ययन (Strategic Studies) के लिए अमेरिका समेत कई विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके डॉ देबीदत्ता ओरबिंदो मोहपात्रा की सेवाएं मिलेगी।

     

    भारतीय दर्शन, योग एवं अंग्रेज़ी भाषा के पाठ्यक्रमों के लिए भी प्रोफेसर स्तर के रिटायर्ड प्राध्यापकों की सेवाएं आमंत्रण आधार पर लेने को भी विद्या परिषद द्वारा मंज़ूरी दी गई। भारतीय दर्शन के लिए चेन्नई विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर जी मिश्रा, योग के लिए बैंगलोर योग विश्वविद्यालय के प्रो. एम. के श्रीधर तथा अंग्रेज़ी के लिए ग्वालियर विश्वविद्यालय के प्रो. ओपी बुधोलिया की सेवाएं ली जाएंगी। बौद्ध अध्ययन के लिए श्री डियोन ओलिवर पीपुल्स की सेवाएं 2017-18 यानी इसी सत्र में उपलब्ध होंगी।

     

    इन पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता के स्तर को बनाए रखने और छात्रों को उसके विषय में संपूर्ण ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। सांची विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध दर्शन, वैदिक दर्शन तथा चीनी भाषा के विश्वस्तरीय पाठ्यक्रम हैं। विश्वविद्यालय द्वारा इस बारे में जर्मनी, जापान, चीन, श्रीलंका, कंबोडिया, विएतनाम के विश्वविद्यालय में अध्ययन करा चुके प्रोफेसरों से बातचीत चल रही है। ऐसा अनुमान है कि इन विश्वस्तरीय प्राध्यापकों की सेवाएं अगले सत्र से विश्वविद्यालय को प्राप्त  हो सकेगी।

     

    विद्या परिषद की बैठक में बोर्ड ऑफ स्टडीज द्वारा अकादमिक सत्र 2017-18 में प्रारंभ किए गए एमएफए भारतीय चित्रकला, भारतीय चित्रकला में एमफिल एवं पीएचडी, संस्कृत में सर्टिफिकेट कोर्स, एमए चाइनीज़ एवं चीनी भाषा में डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी दी गई।