Press Releases
 

 

 

  • नागालैंड के 22 छात्र पहुंचे सांची विश्वविद्यालय
    • - एक दूसरे से साझा की संस्कृति और आचार-विचार
    • - शिक्षा, कला और मौसम पर भी हुई बातचीत
    • - सांची विश्वविद्यालय के छात्रों को नागालैंड आमंत्रित किया
    • - प्रधानमंत्री के एक भारत-श्रेष्ठ भारत  कार्यक्रम के तहत म.प्र की पहल

     

    नागालैंड के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे 22 छात्रों का एक दल सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय पहुंचा। इन छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्राकृतिक वातावरण के अलावा विभिन्न कक्षाओं में पहुंचकर सांची विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मुलाकातें कीं और शिक्षा संबंधी विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इन छात्रों ने एक दूसरे के साथ अपनी संस्कृति, आचार-व्यवहार, कला, शिक्षा, मौसम जैसे विषयों पर बातचीत की। नागालैंड के छात्रों ने भी सांची विश्वविद्यालय के छात्रों को अपने प्रदेश में आमंत्रित किया।

     

    दरअसल, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "एक भारत श्रेष्ठ भारत" पहल के तहत देश के विभिन्न राज्यों के बीच आपसी सामंजस्य बढ़ाने के उद्देश्य से कई राज्यों को एक साथ जोड़ा गया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश का समन्वय उत्तर पूर्वी राज्यों मणिपुर और नागालैंड से स्थापित किया गया है। आपसी संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से तीनों राज्य आपस में पर्यटन, तकनीकी, आयुष, पुलिस और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक दूसरे के विचार साझा करेंगे। मध्य प्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग को इस कार्यक्रम के विनिमय के लिए नोडल संस्था नियुक्त किया है।

     

    रायसेन स्थित बारला अकादमिक परिसर में पहुंचे नागालैंड के छात्रों के दल ने सांची विश्वविद्यालय के छात्रों एवं प्राध्यापकों से विभिन्न पाठ्यक्रमों, चयन प्रक्रिया, छात्रवृत्ति इत्यादि के संबंध में जानकारियां ली। नागा छात्रों का यह दल मध्य प्रदेश के विभिन्न एतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण कर रहा है। प्रधानमंत्री के "एक भारत श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम के तहत मध्य प्रदेश से पर्यटन, तकनीक, आयुष, मेडिकल, पुलिस और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न दल नागालैंड और मणिपुर जाएंगे। नागालैंड के छात्रों के दल की ही तरह मणिपुर के छात्रों का दल भी मध्य प्रदेश आएगा।

     

  • आदि शंकराचार्य की एकात्‍म यात्रा पर परिचर्चा  

     

    • - 'निष्काम कर्म योग से ही भारत राष्ट्रीय सूत्र में बंधा'
    • - 'आदि शंकराचार्य ने जातिवाद के विरुद्ध प्रखर स्वर उठाए'
    • - 'शास्त्र रचना का रूप ही आदि शंकराचार्य ने दिया था'

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में बुधवार को ''जगतगुरु आदि शंकराचार्य जी और एकात्‍म यात्रा'' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। विश्‍वविद्यालय के बारला स्थित अकादमिक परिसर में परिचर्चा के दौरान सहायक प्राध्यापक श्री विश्व बंधु ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने निष्काम कर्म योग के माध्यम से भारत को राष्ट्रीय सूत्र में बांधने का प्रयास किया।

     

    उनका कहना था कि जगदगुरु आदि शंकराचार्य के प्रयासों से ही भारत सांस्कृतिक सूत्र में एक रूप हो सका। श्री विश्वबंधु का कहना था कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को अद्वैतवाद के तत्व द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करते हुए जातिवाद के विरुद्ध प्रखर स्वर उठाए।

     

    सहायक प्राध्यापक श्री नवीन दीक्षित ने कहा कि समाज के बांटने वाली शक्तियां भगवान बुद्ध और आदि शंकराचार्य को एक दूसरे के विरोधी की तरह चित्रित करती हैं जबकि दोनों की ही शिक्षाएं पूर्ण रूप से एकात्म होने का संदेश देती हैं।

     

    परिचर्चा का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सह प्राध्यापक श्री नवीन मेहता ने कहा कि शास्त्र रचना का स्वरूप किस तरह का होना चाहिए यह आदि शंकराचार्य ने ही सर्वप्रथम बताया था।

     

    एकात्म यात्रा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 19 दिसंबर 2017 से 22 जनवरी 2018 तक की जा रही है। इस यात्रा का समापन 22 जनवरी को ओंकारेश्‍वर में होगा। इस यात्रा के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान संपूर्ण राष्ट्र को एक संस्कृति में एकात्म करने का प्रयास कर रहे हैं। इस यात्रा के ज़रिए भारत की भाषिक और शारीरिक विविधता के साथ-साथ विचार को एकात्म किये जाने के प्रयास हैं।

     

  • सांची विश्वविद्यालय के 8 छात्र यूजीसी नेट में चयनित

     

    सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के 8 छात्र जून 2017 की यूजीसी नेट परीक्षा में चयनित हुए हैं। सांची विश्वविद्यालय के इन सभी 8 छात्रों ने नवंबर 2017 में नेट की परीक्षा दी थी। यह कामयाबी हासिल करने वाले छात्रों में से चार योग विभाग के छात्र हैं जबकि दो हिंदी के तथा एक संस्कृत और एक बौद्ध अध्ययन विभाग का है। नेट यानी नेशनल एलीजीबिलिटी टेस्ट में चयनित होने पर कोई भी छात्र/शोधार्थी विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज स्तर पर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन के लिए पात्र हो जाता है।

     

    नेट परीक्षा में कामयाब होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य प्रोफेसर याज्ञेश्वर शास्त्री ने इन छात्रों को बधाई दी। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी अपनी सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय में एम.फिल और पी.एच.डी के पाठ्यक्रमों के प्राध्यापकों को दिया है। इन छात्रों का कहना है कि प्राध्यापकों द्वारा दोनों ही पाठ्यक्रमों के दौरान ही उन उन्हें नेट की परीक्षा की तैयारी की प्रेरणा दी जाती रही। पिछले साल भी सांची विश्वविद्यालय से 3 छात्रों ने यूजीसी नेट की परीक्षा में सफलता हासिल की थी।

     

    सांची विश्वविद्यालय पी.एच.डी करने वाले प्रत्येक छात्र को प्रतिमाह 14 हज़ार रुपए एवं एम.फिल करने वाले प्रत्येक छात्र को 8 हज़ार रुपए की स्कॉलरशिप देता है तथा नेट जैसी परीक्षाओं के लिए विशेष अध्ययन क्लासेस भी आयोजित करता है।

    इस साल जिन छात्रों का चयन यूजीसी नेट में हुआ है उनकी सूची निम्नानुसार है-

     

    क्र.

    नाम

    विभाग

    1.

    रोशन कुमार भारती

    एम.फिल(योग)

    2.

    भानू प्रताप बुंदेला

    एम.फिल(योग)

    3.

    बृजेश नामदेव

    एम.एस.सी(योग)

    4.

    धनंजय कुमार जैन

    पी.एच.डी(योग)

    5.

    अनीश कुमार

    पी.एच.डी(हिंदी)

    6.

    कपिल कुमार गौतम

    एम.फिल(हिंदी)

    7.

    आशीष आर्य

    पी.एच.डी(संस्कृत)

    8.

    लेखराम सेलोकर

    पी.एच.डी(बौद्ध अध्ययन)

     

  • कैलाश सत्यार्थी का विशिष्ट व्याख्यान - बच्चों से अनैतिकता की महामारी के खिलाफ संपूर्ण महायुद्ध का ऐलान

     

    भारत की आत्मा को जागृत करने के लिए सांची विवि बधाई का पात्र-श्री सत्यार्थी

    बच्चों से अनैतिकता की महामारी के खिलाफ संपूर्ण महायुद्ध का ऐलान

    "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

     

    नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने आज सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से संवाद किया। मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ जारी भारत यात्रा के दौरान बारला अकादमिक परिसर पहुंचे श्री सत्यार्थी ने कहा कि कहा कि आत्मशक्ति, नैतिकता और सच्चाई का बल संख्या बल से ज्यादा ताकतवर होता है और सांची विश्वविद्यालय भारत की आत्मा को जागृत करने का कार्य कर रहा है जिसके लिए विवि को बधाई दी जाना चाहिए। विवि के छात्रों के आग्रह पर "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" विषय पर बोलते हुए उन्होने कहा कि अनैतिकता और यौन हिंसा की बढ़ती महामारी देश के सामाजिक मूल्यों को खोखला कर रही जिसके खिलाफ खड़े होने का वक्त आ गया है। भारत यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें डर छोड़कर अभय बनना होगा और इसीलिए उन्होने बच्चों, लड़कियों और अबलाओं की सुरक्षा के लिए संपूर्ण महायुद्ध छेड़ा है। कन्याकुमारी के शुरू हुई भारत यात्रा के साथ सांची विवि पहुंचे श्री सत्यार्थी ने कहा कि हम उदासीन हो गए हैं जिसकी वजह से हमारे अंदर आत्महंतक निष्क्रियता (सुसाइडल पैसिविटी) बढ़ती जा रही है। उन्होंने हवाला दिया कि पड़ोस में  लगी आग के बाद भी हम ये सोचकर निष्क्रिय बने रहते हैं कि आग हमारे घर में नहीं लगी है और यह प्रवृत्ति हमें समाप्त किए जा रही है।

     

    सुबह 10.30 बजे बारला अकादमिक परिसर पहुंचे श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि हमें डर, चुप्पी निष्क्रियता और उदासीनता को पीछे छोड़कर भयमुक्त भारत के रुप में नए भारत के निर्माण की शुरुआत करना चाहिए। वेद और पुराणों का हवाला देते हुए श्री सत्यार्थी ने कहा कि परहित और परपीड़ा को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है और इसीलिए मानव कल्याण और भय के खिलाफ खड़े होना सबसे बड़ा धर्मयुद्ध है। उन्होने सभी छात्रों एवं मौजूद लोगों को संकल्प दिलाते हुए सभी के अंदर बैठे बाल शोषण, बाल हिंसा  और अनाचार रुपी राक्षस के वध का आव्हान किया। श्री सत्यार्थी के वक्तव्य से छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों को सेवा, करुणा एवं बाल समस्याओं के क्षेत्र में एक नोबल पुरस्कार विजेता के अनुभवों का सीधा लाभ प्राप्त हुआ। श्री कैलाश सत्यार्थी ने बताया कि नोबल पुरस्कार मिलने के बाद उन्होने अपना नोबल पुरस्कार राष्ट्रपति भवन पहुंचकर देश को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस नोबल पुरस्कार की सुरक्षा के साथ पूरा देश इस संकल्प में है कि वो बाल अपराध के खिलाफ उनकी इस यात्रा में उनके साथ है।

     

    कार्यक्रम के अध्यक्ष औऱ विवि के कुलपति प्रो यज्नेश्वर शास्त्री ने श्री सत्यार्थी का स्वागत करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का राष्ट्र संत करार दिया। उन्होने कहा कि शांति, करुणा, मैत्री और राष्ट्र निर्माण का संदेश बुद्ध ने भी दिया था और उनके पदचिन्हों पर चलकर श्री सत्यार्थी राष्ट्र निर्माण में लगे हुए है। कार्यक्रम में एडीजी और कुलसचिव श्री राजेश गुप्ता एवं विवि की डीन श्रीमति सुनंदा शास्त्री भी मौजूद रही। धन्यवाद प्रो नवीन मेहता ने किया।

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनरुद्धार और उच्च कोटि के शोध को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विश्वविद्यालय है। सांची विश्वविद्यालय का वैकल्पिक शिक्षा केंद्र, शिक्षा के विभिन्न मॉडलों और पद्धतियों पर कार्य कर रहा है। विभिन्न शिक्षा पद्धतियों पर शोध के बाद विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक शिक्षा पर पाठ्यक्रम भी तैयार करेगा।

  • कैलाश सत्यार्थी का विशिष्ट व्याख्यान - "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

     

    नोबल पुरस्कार विजेता करेंगे छात्र-छात्राओं से संवाद

    "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणा, दया और बालक" पर व्याख्यान

    5 अक्टूबर 2017, गुरुवार को विवि के बारला अकादमिक परिसर में प्रात् 9.30 बजे व्याख्यान

     

    नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी, 05 अक्टूबर को सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे। सांची विवि की विशिष्ट पद्धति और उद्देश्य से प्रभावित श्री सत्यार्थी मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ जारी भारत यात्रा के दौरान सांची विवि में विशिष्ट वक्तव्य के लिए वक्त देना स्वीकार कर लिया। सांची विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कैलाश सत्यार्थी से आग्रह किया था कि वो "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करुणादया और बालकविषय को अपने व्याख्यान का आधार बनाए। श्री सत्यार्थी को उपरोक्त विषय बहुत ही पसंद आया और उन्होने व्याख्यान हेतु सहमति दे दी।

     

    कैलाश सत्यार्थी सुबह 09.00 बजे विदिशा से सांची विवि के बारला अकादमिक परिसर पहुंचेंगे जहां वो छात्रों से संवाद करेंगे एवं व्याख्यान देंगे। व्याख्यान के बाद छात्र बाल अपराध और समाधान और नोबल पुरस्कार विजेता के कर्मशील जीवन से जुड़ी जिज्ञासाएं और सवाल सीधे श्री कैलाश सत्यार्थी से करेंगे।  उनके वक्तव्य से छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों को सेवा, करुणा एवं बाल समस्याओं के क्षेत्र में एक नोबल पुरस्कार विजेता के अनुभवों का लाभ मिल सकेगा।

     

    भारत यात्रा के दौरान कैलाश सत्यार्थी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के बच्चों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि बच्चों के साथ होने वाले दैहिक शोषण एवं हिंसा तथा बाल अपराध के विषय में छात्रों को जागरुक किया जा सके और बाल अपराध के प्रति छात्रों को जागरुक किया जा सके। यह यात्रा कन्याकुमारी के शुरू हुई थी जो कि नई दिल्ली में समाप्त होगी।

     

    कैलाश सत्यार्थी विदिशा ज़िले के रहने वाले हैं और उन्होंने यहीं के सम्राट अशोक इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की है। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय दर्शन और प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनरुद्धार और उच्च कोटि के शोध को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विश्वविद्यालय है। सांची विश्वविद्यालय वैकल्पिक शिक्षा केंद्र, शिक्षा के विभिन्न मॉडलों और पद्धतियों पर कार्य कर रहा है। विभिन्न शिक्षा पद्धतियों पर शोध के बाद विश्वविद्यालय ने अपना पाठ्यक्रम तैयार किया है।

  • सांची विश्वविद्यालय में मना स्वच्छता पखवाड़ा

     

    आसपास की स्वच्छता के साथ आचार-विचार में भी हो शुद्ध- कुलपति प्रो शास्त्री

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कई गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। परिसर एवं भवनों की सफाई के साथ ही इस दौरान अपने आस-पास को स्वच्छ रखने एवं पर्यावरण को संरक्षित रखने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है। परिसर की सफाई के उपरांत कार्यक्रम में पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य प्रो यज्ञेश्वर एस शास्त्री ने स्वच्छता को साझा प्रयास के रुप में अपनाने की ज़रुरत बताई। उन्होने कहा कि स्वच्छता ना सिर्फ वातावरण और साधनों की होना चाहिए बल्कि हमारे विचार एवं आचार भी शुद्ध होना चाहिए। कुलपति महोदय ने पर्यावरण के महत्व को रेखांकित करते हुए पौधारोपण कर कार्यक्रम का समापन किया।

     

    इस अवसर पर स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान किए गए प्रयासों को पूरे वर्षभर जारी रखने का भी आव्हान किया गया। स्वच्छता पखवाड़ा में विश्वविद्यालय के सभी छात्र एवं अध्यापकगण द्वारा भागीदारी की जा रही है। विश्वविद्यालय अनुसंधान आयोग की पहल पर विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान ग्रीन कैंपस डे, क्लीन कैंपस डे, क्लीन हॉस्टल डे, सबसे साफ हॉस्टल रुम जैसे कई आयोजन किए गए।

  • हिंदी दिवस पर साँची विश्वविद्यालय में हिंदी का ब्लॉग लोकार्पित

     

    जिसमे सोच, विचार, चिंतन मनन हो वही भाषा है- नवल शुक्ल
    भाषा धरती पर मनुष्य का पहला औज़ार थी- नवल शुक्ल
    सफल प्रतिभागी हुए पुरस्कृत, भित्ती पत्रिका 'पारमिता' भी जारी

     

    साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्यन विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग के ब्लॉग www.subishindi.blogspot.in की शुरुआत की गई। हिंदी विभाग के ब्लॉग पर विभाग एवं विवि के छात्र एवं कर्मचारियों के आलेख, कविताएं एवं अन्य जानकारी तथा हिंदी भाषा संबंधी रुचिपूर्ण लेख प्रकाशित किए जाएंगे। 14 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह के मुख्य अतिथि एवं साहित्यकार श्री नवल शुक्ल ने कहा कि जिस भाषा में चिंतन, मनन ,सोच और व्यवहार हो वहीं भाषा है। उनके मुताबिक भाषा मनुष्य के भावों को व्यक्त करने के लिए व्यक्ति का पहला औजार थी। श्री शुक्ल ने कहा कि चेतना का स्तर स्वभाषा से ही बेहतर होगा। उनके मुताबिक प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है कि २०० शब्दों से व्यक्ति के संवाद का काम चल सकता है लेकिन भाषा व्यक्ति को विविधता और व्यापकता देती है। श्री शुक्ल ने विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की भित्ती पत्रिका 'पारमिता' को भी जारी किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी भाषा के सह प्राध्यापक प्रो नवीन मेहता ने कहा कि लोगों को चाहिए की वो भाषा को सीखे, समझे और भाषा के साथ स्वयं को भी उन्नत करें।

     

    हिंदी सप्ताह के अवसर पर बारला स्थित अकादमिक परिसर में हिंदी भाषा पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं। 12 सितंबर को निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता हुई वहीं 13 सिंतबर को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। मुख्य समारोह में कविता पाठ हुआ जिसमें छात्रों, कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप किताब उपहार में दी गई। जिन विजेताओं ने प्रथम पुरस्कार जीते उनके नाम निम्नानुसार हैं-

     

    • निबंध प्रतियोगिता- उमाशंकर कौशिक, पीएचडी छात्र योग 
    • पोस्टर प्रतियोगिता - भारत जैन, पीएचडी पैन्टिंग
    • भाषण - गौतम आर्य, एमए संस्कृत
    • कविता पाठ- स्नेहलता, पीएचडी पैन्टिंग
  • ताइवान की नानहुआ यूनिवर्सिटी में पढ़ेंगे सांची विश्वविद्यालय के खेमराज

     

    एम.ए कोर्स के लिए हुआ खेमराज का चयन
    सांची विश्वविद्यालय में चीनी भाषा डिप्लोमा के छात्र हैं खेमराज शर्मा

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के छात्र खेमराज शर्मा अब ताइवान में पढ़ाई करेंगे। उनका चयन ताइवान के नानहुआ विश्वविद्यालय में एम.ए कोर्स में हुआ है। वो नानहुआ विश्वविद्यालय में धार्मिक अध्ययन विषय पर एम.ए के साथ ही चीनी भाषा में डिप्लोमा भी करेंगे। खजुराहो के रहने वाले खेमराज शर्मा पिछले वर्ष सांची विश्वविद्यालय से चीनी भाषा में एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स कर चुके हैं। इस वर्ष उन्होंने बारला स्थित अकादमिक परिसर में चीनी भाषा के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में एडमिशन लिया था।

     

    पिछले एक माह से उनकी क्लासेस जारी थी , लेकिन ताइवान के विश्वविद्यालय में चयन के बाद अब इस पाठ्यक्रम को वो एम.ए पाठ्यक्रम के साथ नानहुआ विश्वविद्यालय से ही पूरा करेंगे। सोमवार को ताइवान के लिए रवाना हो रहे खेमराज के चयन की सबसे खास बात ये है कि उनकी पढ़ाई का खर्च या ट्यूशन फीस ताइवानी यूनिवर्सिटी वहन करेगी। नानहुआ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें रहने की सुविधा भी बगैर किसी फीस के मुहैया कराई जाएगी।

     

    इस कोर्स के लिए खेमराज का दिल्ली में नानहुआ विवि की टीम द्वारा लंबा इंटरव्यू लिया गया। इंटरव्यू में सफलता के लिए खेमराज शर्मा ने सांची विवि की चीनी भाषा की सहायक प्राध्यापक प्राची अग्रवाल के मार्गदर्शन को विशेष श्रेय दिया। उनके मुताबिक सांची विश्वविद्यालय का चीनी भाषा कोर्स ने ही उनके लिए नए रास्ते खोले। खेमराज ने कहा कि वो सर्टिफिकेट कोर्स में एडमिशन नहीं लेते तो उन्हें विदेशी विश्वविद्यालय से पढ़ाई का सुनहरा मौका नहीं मिल पाता।

  • विदेशी प्रोफेसर्स करेंगे सांची विश्वविद्यालय में अध्यापन

     

    विद्या परिषद में कई विषयों पर अहम निर्णय

     

    सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में छात्रों को कई देशों में पढ़ा चुके प्रोफेसर्स से पढ़ने का मौका मिलेगा। विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय छवि के अनुरूप सांची विश्वविद्यालय की विद्या परिषद ने इन प्रोफेसरों के सांची विश्वविद्यालय को अपनी सेवाएं देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सांची विश्वविद्यालय को बौद्ध अध्ययन पाठ्यक्रम के लिए थाइलैंड विश्वविद्यालय के श्री डियोन ओलिवर पीपुल्स तथा सामरिक अध्ययन (Strategic Studies) के लिए अमेरिका समेत कई विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके डॉ देबीदत्ता ओरबिंदो मोहपात्रा की सेवाएं मिलेगी।

     

    भारतीय दर्शन, योग एवं अंग्रेज़ी भाषा के पाठ्यक्रमों के लिए भी प्रोफेसर स्तर के रिटायर्ड प्राध्यापकों की सेवाएं आमंत्रण आधार पर लेने को भी विद्या परिषद द्वारा मंज़ूरी दी गई। भारतीय दर्शन के लिए चेन्नई विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर जी मिश्रा, योग के लिए बैंगलोर योग विश्वविद्यालय के प्रो. एम. के श्रीधर तथा अंग्रेज़ी के लिए ग्वालियर विश्वविद्यालय के प्रो. ओपी बुधोलिया की सेवाएं ली जाएंगी। बौद्ध अध्ययन के लिए श्री डियोन ओलिवर पीपुल्स की सेवाएं 2017-18 यानी इसी सत्र में उपलब्ध होंगी।

     

    इन पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता के स्तर को बनाए रखने और छात्रों को उसके विषय में संपूर्ण ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। सांची विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध दर्शन, वैदिक दर्शन तथा चीनी भाषा के विश्वस्तरीय पाठ्यक्रम हैं। विश्वविद्यालय द्वारा इस बारे में जर्मनी, जापान, चीन, श्रीलंका, कंबोडिया, विएतनाम के विश्वविद्यालय में अध्ययन करा चुके प्रोफेसरों से बातचीत चल रही है। ऐसा अनुमान है कि इन विश्वस्तरीय प्राध्यापकों की सेवाएं अगले सत्र से विश्वविद्यालय को प्राप्त  हो सकेगी।

     

    विद्या परिषद की बैठक में बोर्ड ऑफ स्टडीज द्वारा अकादमिक सत्र 2017-18 में प्रारंभ किए गए एमएफए भारतीय चित्रकला, भारतीय चित्रकला में एमफिल एवं पीएचडी, संस्कृत में सर्टिफिकेट कोर्स, एमए चाइनीज़ एवं चीनी भाषा में डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी दी गई।