A- A A+

‘प्रतिदिन करें योग तभी रहेंगे निरोग’

‘प्रतिदिन करें योग तभी रहेंगे निरोग’

  • सांची स्तूप पर सांची विवि ने किया योग दिवस का आयोजन
  • पीएम मोदी के कार्यक्रम में भी हुआ लाइव प्रसारण
  • मन, मस्तिष्क और शरीर से स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ -कुलपति

सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के योग विभाग के छात्रों ने सांची स्तूप पर योगाभ्यास कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सांची स्तूप के सामने योग के आसनों को प्रस्तुत किया।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर छात्रों ने पद्मानाभासन, भद्रासन, भुजंगासन, चक्रासन, हलासन, गोमुखासन, धनुरासन आदि का अभ्यास किया। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन के दौरान दूरदर्शन पर भी किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ श्याम गनपत तिखे ने कहा कि प्रतिदिन योग करने से ही निरोग रहा जा सकता है।

सांची विश्वविद्यालय परिसर में हुए योग दिवस कार्यक्रम में शिक्षकों-छात्रों, अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता भी सम्मिलित हुईं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी नेमत निरोगी काया है। जब मन, मस्तिष्क और शरीर स्वस्थ होंगे तभी व्यक्ति को स्वस्थ कहा जा सकता है। उनका कहना था कि योग के माध्यम से ही मन, मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। कुलपति डॉ गुप्ता ने कहा कि आनंद की अनुभूति पर बौद्ध गुरू दलाई लामा ने कहा था कि उचित श्वसन ही आनंद है और इस हिसाब से योग; सत्, चित्त और आनंद की प्राप्ति का अहम सूत्र है।

स्वयं का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता ने कहा कि वो पिछले 48 सालों से योग कर रही हैं और योग ने ही उन्हें मन, मस्तिष्क और शरीर से स्वस्थ रखा हुआ है क्योंकि उनका Tsh (टी.एस.एच) थाइराइड लेवल 16 रहता था लेकिन योग के ज़रिए ही उन्होंने इस संतुलन को पाया हुआ है। उनका कहना था कि यदि यह टी.एस.एच 6 से 8 के आसपास होता है तो व्यक्ति मोटापे से ग्रसित हो जाता है,  लेकिन योग के कारण ही वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

Welcome to Sanchi University of Buddhist-Indic Studies

On 21 September, 2012, the then President of Sri Lanka Shri Mahindra Rajapaksa laid the foundation stone of the Sanchi University of Buddhist-Indic Studies together with the former Prime Minister of Bhutan HE Jigme Yoser Thinley on a hillock on the Bhopal-Vidisha Highway having its proximity to Sanchi-better known for its Buddhist stupas.

The University is trying all its earnest efforts for reviving the old glosry of Great Ancient Indian Education System and enlivening the present scenario by adding values to multifaceted aspects of knowledge, practice and wisdom for the benefit of humankind. The University is carving a niche for preserving treasure of knowledge where ancient Indian wisdom is emerging as a guiding spirit for the contemporary knowledge systems. 

Sanchi University is established to address the global issues & shall generally cover educationalists, academicians, philosophers, researchers, practitioners across the world but shall primarily focus on Asian countries - the land of genesis & spread of Buddhist-Indic culture. All aspects of Buddhist-Indic Studies from philosophy to culture; from economics to governance shall be addressed in a holistic manner. 


BUDDHIST CIRCUIT